इलेक्ट्रिक कारों के बाजार में बड़े घमासान की तैयारी, टाटा मोटर्स सेगमेंट की सबसे बड़ी कंपनी, आसान चार्जिंग सुविधा देने पर KIA का फोकस

पेट्रोल-डीजल के क्षेत्र में झंडा लहराने वाली टाटा मोटर्स और हुंडई इलेक्टि्रक कारों की लांचिंग की तैयारी में आगे दिख रही हैं। वहीं टोयोटा और फाक्सवैगन जैसी कंपनियां फिलहाल कमर कसते ही दिख रही हैं। माना जा रहा है कि वर्ष 2030 तक भारतीय बाजार में बिकने वाली 30 प्रतिशत कारें बिजली से चलने वाली होंगी। हालांकि यह कहना मुश्किल है कि तब आटो बाजार का लीडर कौन होगा।



तैयारियों के हिसाब से देखें तो टोयोटा किर्लोस्कर ने दावा किया है कि वह पूरी तरह से भारत में निर्मित ईवी लांच करेगी और वह भी बहुत ही कम समय के भीतर। कंपनी का दावा है कि उसकी कार आम भारतीयों के लिए होगी और इसकी डिजाइन से लेकर निर्माण तक का काम पूरी तरह से भारत में ही होगा। भारतीय ईवी बाजार में अभी टाटा मोटर्स अपने दो माडलों के साथ सबसे बड़ी कंपनी बनी हुई है। वर्ष 2022-23 में देश में 35 लाख कारों के बिकने की संभावना है जिसमें से पांच प्रतिशत यानी 70 हजार ईवी होने की संभावना है।

भारतीय ग्राहकों के लिए एक विशेष इलेक्टि्रक पैसेंजर कार तैयार करने में जुटी किआ मोटर्स इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट व हेड (सेल्स व मार्केटिंग) हरदीप सिंह बरार का कहना है कि वर्ष 2030 तक भारत में 50-55 लाख कारें बिकेंगी, जिसमें से 30 प्रतिशत यानी 15 लाख ईवी होंगी। यह बहुत ही बड़ा बाजार है जिस पर सभी कंपनियों की नजर है। कंपनी का मुख्य फोकस इस बार पर है कि आम जनता को आसानी से चार्जिंग सुविधा उपलब्ध हो। कंपनी की कोशिश यह भी है कि ईवी की बैट्री की लागत कम हो सके।

पूरी तरह से भारत में विकसित ईवी बनाएगी टोयोटा


दैनिक जागरण को टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट विक्रम गुलाटी ने बताया कि उनकी कंपनी पूरी तरह से भारतीय ग्राहकों और भारतीय माहौल को ध्यान में रखते हुए यहां के आम ग्राहकों के लिए एक ईवी बाजार में उतारेगी। गुलाटी बताते हैं कि कोशिश सिर्फ यह नहीं है कि भारत के लिए एक ईवी बनाई जाए बल्कि यह ऐसी ईवी होगी जिसमें डिजाइन से निर्माण तक और मार्केटिंग से पुरानी पड़ चुकी ईवी की री-साइक्लिंग का काम इस तरह से किया जाए कि पर्यावरण को बहुत कम नुकसान हो।

चूंकि कंपनी की योजना पूरे देश में और गैर शहरी क्षेत्रों में भी अपनी इलेक्टि्रक पैसैंजर कार को बेचने की है इसलिए वह अपनी मार्केटिंग ढांचे में भी बड़े बदलाव करने जा रही है। कंपनी भारत में ही ईवी के लिए बैट्री बनाएगी और इसकी री-साइ¨क्लग का भी ढांचा तैयार करेगी। गुलाटी यह भी बताते हैं कि टोयोटा के लिए भारतीय ईवी प्लांट दुनिया को ईवी निर्यात करने का एक प्रमुख हब होगा।

हुंडई की बात करें तो उसने 4000 करोड़ रुपये के निवेश से वर्ष 2028 तक छह नई ईवी उतारने की योजना की जानकारी दी है। कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि भारत में विकसित उनकी पहली ईवी वर्ष 2024 में आ सकती है। हुंडई भी भारत को अपने ईवी के हब के तौर पर देख रही है। अगर टाटा मोटर्स की बात करें तो उसकी नेक्सान अभी ईवी बाजार की लीडर है लेकिन यह मूल तौर पर पेट्रोल कार ही है। कंपनी पहली बार पूरी तरह से ईवी के तौर पर तैयार माडल को वर्ष 2025 तक बाजार में उतारेगी।

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